हाईकोर्ट लखनऊ पीठ में शासकीय अधिवक्ता की नियुक्ति नहीं होने पर कार्य प्रभावित, प्रमुख सचिव (विधि ) को हाईकोर्ट ने किया तलब
17 April 2012 13:50 केशव पाण्डेय लखनऊ

हाईकोर्ट लखनऊ पीठ में शासकीय अधिवक्ता (गवर्मेंट एडवोकेट) की नियुक्ति नहीं होने पर नाराजगी व्यक्त करते हुए प्रमुख सचिव (विधि) को आगामी १८ अप्रैल २०१२ को हाईकोर्ट लखनऊ पीठ तलब किया है| पीठ के न्यायमूर्ति अब्दुल मतीन एवम न्यायमूर्ति सुधीर कुमार सक्सेना ने उक्त आदेश पारित करते हुए प्रमुख सचिव (विधि ) से स्पष्टीकरण माँगा है कि आज तक राज्य सरकार ने हाईकोर्ट लखनऊ पीठ में शासकीय अधिवक्ता की नियुक्ति क्यों नहीं की| पीठ ने यह भी स्पष्ट करे को कहा कि जबतक शासकीय अधिवक्ता की नियुक्ति नहीं हो जाती है तबतक सुचारू रूप से अदालती कार्यवाही चलने के लिए क्या उचित कदम उठाये गए है|
पीठ ने कहा कि शासकीय अधिवक्ता के अदालत में उपस्थित नहीं होने के कारण लगभग प्रतिदिन न्यायिक कार्य सम्पादित करने में काफी कठिनाई हो रही है | पीठ ने उक्त आदेश सन १९८२ में राज्य सरकार की दाखिल एक विचाराधीन दाण्डिक अपील न. -१३४/१९८२ की सुनवाई के दौरान पारित किये| उक्त अपील राज्य सरकार ने अभियुक्त को छोडे जाने के विरोध में दाखिल की थी 1 उक्त अपील आज सुनवाई के लिए पीठ के समक्ष लगी थी किन्तु राज्य सरकार की ओर से कोई सरकारी वकील उपस्थित नहीं हुआ| पीठ ने अपने आदेश में कहा किउक्त अपील जब सुनवाई के लिए प्रस्तुत हुई उस समय अदालत में कई अतिरिक्त शासकीय अधिवक्ता/ब्रीफ होल्डर उपस्थित थे|
पीठ ने कहा कि जानकारी करने पर बताया गया कि किसी भी अतिरिक्त शासकीय अधिवक्ता/ब्रीफ होल्डर को इस अपील को सुपुर्द (एलोट) नहीं किया गया है क्यों कि आज तक राज्य सरकार ने किसी शासकीय अधिवक्ता कि नियुक्ति नहीं की है| जिस पर पीठ ने उक्त आदेश पारित किये| ज्ञातव्य है कि हाईकोर्ट लखनऊ पीठ में इस पद पर शासकीय अधिवक्ता नियुक्त एम. पी. यादव ने बसपा सरकार बदलने के बाद मार्च २०१२ इस पद से त्याग पत्र दे दिया था और जिसे मंजूर कर लिया गया था , तब से उक्त पद पर सरकार ने कोई नियुक्ति नहीं की थी|